भाजपा की विस चुनाव में नोटबंदी को भुनाने की तैयारी

नई दिल्ली। भाजपा ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह नोटबंदी के मामले में बैकफुट पर नहीं जाएगी बल्कि विधानसभा चुनाव में नोटबंदी को ही गरीबों के हित में जोड़कर उसे भुनाने की कोशिश करेगी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का उद्घाटन करते हुए साफ कर दिया कि नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला गरीब वर्ग के हितों में योजनाओं के लिए ही किया गया है। उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। बैठक में पार्टी के संसदीय दल और कार्यकारिणी ने नोटबंदी के लिए प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत भी किया। हालांकि, बाद में पार्टी नेता प्रकाश जावड़ेकर उस सवाल से बचते नजर आए, जिसमें पूछा गया था कि क्या पार्टी विधानसभा चुनावों को नोटबंदी पर जनमत संग्रह मानती है? शाह ने कहा कि नोटबंदी के फैसले का सबसे ज्यादा फायदा गरीबों को ही होगा। उन्होंने कहा कि अब तक सरकार कम टैक्स मिलने की वजह से गरीबों और विकास योजनाओं के लिए महज चार लाख 70 हजार करोड़ रूपये तक की राशि ही खर्च कर पाती थी। लेकिन नोटबंदी और फिर कैशलेस इकॉनमी होने से सरकार को टैक्स का एक-एक पैसा मिलेगा। इस तरह से टैक्स कलेक्शन बढऩे से सरकार गरीब कल्याण पर ज्यादा पैसा खर्च कर सकेगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से नक्सलवाद, आतंकवादी, जाली नोट बनाने वालों और टैक्स चोरी करने वालों को जोरदार झटका लगा है। अगर टैक्स कलेक्शन नहीं बढ़ता तो मौजूदा सरकार और पूर्ववर्ती सरकारों को कोई फर्क ही नहीं पड़ता। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह फैसला सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए नहीं बल्कि देशहित को मद्देनजर रखकर लिया गया है। यही नहीं, इस फैसले के बाद विपक्ष भी बेनकाब हो गया है। पहले विपक्ष पूछता था कि सरकार ने काले धन पर क्या किया है लेकिन अब वही विपक्ष पूछ रहा है कि यह क्यों किया है? उन्होंने बिना नाम लिए कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष नोटबंदी का विरोध इसलिए कर रहा है, क्योंकि गरीब उनके हाथ से निकल गया है। इस योजना को लोग भी पसंद कर रहे हैं। इसका सबूत यह है कि नोटबंदी के बाद जिन 10 हजार सीटों पर चुनाव हुए, उनमें से 8 हजार पर भाजपा जीती और कई ऐसे राज्यों में भी जीती, जहां वह चौथे नंबर पर होती थी। शाह ने संकेत दिया कि नोटबंदी का मामला विधानसभा चुनाव का मुद्दा बनेगा और पार्टी इन सभी राज्यों में जीत हासिल करेगी। मणिपुर से भाजपा को खास उम्मीद है इसलिए अब भाजपा द्वारा वहां मणिपुर बंदमुक्त का नारा दिया जाएगा। जावड़ेकर ने अध्यक्ष के भाषण की जानकारी देते हुए बताया कि अध्यक्ष ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने और लोकसभा व विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने के मकसद से पार्टी की एक कमिटी भी बनाई है। राहुल-केजरी पर हमला प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अध्यक्ष ने अपने भाषण में किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन आतंकवादी कैंपों पर सर्जिकल अटैक को भी ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना कहा कि एक नेता खून की दलाली की बात कर रहा था और दूसरा सबूत मांग रहा था। जबकि आतंकवादियों पर सर्जिकल अटैक का सरकार का फैसला ऐतिहासिक है। उन्होंने इस फैसले के लिए भी मोदी सरकार की जमकर तारीफ की और कहा कि भाजपा और सरकार की आतंकवाद को लेकर जीरो टोलरेंस की नीति जारी रहेगी।नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का उद्घाटन तो किया लेकिन वह नाराज दिखे और मंच पर भी आसीन नहीं हुए। आडवाणी पहले तो सभागार में समारोह शुरू होने से पहले नीचे अपनी सीट पर बैठे थे। जब दीप प्रज्वलन के लिए उनका नाम पुकारा गया तो वह मंच पर नहीं आये। इसके बाद संगठन महासचिव रामलाल उन्हें मनाते दिखे। इसके बाद आडवाणी मंच पर आये और उन्होंने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उस समय मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा वित्त मंत्री अरूण जेटली भी मौजूद थे और उन्होंने भी दीप प्रज्वलन में हिस्सा लिया । इसके बाद आडवाणी मंच से नीचे उतर गये और सभागार से बाहर निकलते हुए दिखे जबकि मोदी, शाह अपनी सीटों पर बैठ गये। इसके बाद जेटली आडवाणी के पीछे -पीछे जाते दिखे । ऐसा प्रतीत हुआ वह आडवाणी को मनाने के लिए गये थे। कुछ देर बाद जेटली वापस मंच पर लौट आये। इसके बाद मंच से यह घोषणा की गयी कि आडवाणी अभी विश्राम कर रहे हैं । कार्यकारिणी की बैठक के बाद प्रेस ब्रीङ्क्षफग के दौरान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से यह पूछे जाने पर कि आडवाणी सभागार में देर से भी आये और पीछे ही बैठे रहे, क्या वह नाराज थे, उन्होंने (जावड़ेकर) कहा कि ऐसा कुछ नहीं था। जावड़ेकर ने कहा कि क्या आप लोग नहीं चाहते कि कोई 'जनसुविधाÓ के लिए भी बाहर जाये। गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही लगातार ठप रहने पर भी आडवाणी ने अपनी नाराजगी जतायी थी और कहा था कि संसद को सुचारू रूप से चलाना सरकार और लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी है।